ज़ोर शोर से चल रही कुमांऊ व गढ़वाल में मां नंदा देवी महोत्सव की तैयारी 


ज़ोर शोर से चल रही कुमांऊ व गढ़वाल में मां नंदा देवी महोत्सव की तैयारी 

उतराखंड के कुमांऊ गढ़वाल के अलग- अलग जगहों पर मां नंदा देवी महोत्सव की तैयारी जोर शोर से चल रही है।

कहीं पर तीन दिवसीय कहीं पर पांच दिवसीय कहीं पर सात दिवस तक महोत्सव आयोजित किया जाता है। मां नंदा देवी महोत्सव बड़ी धूमधाम व हर्षोउल्लास से हर साल की तरह इस साल भी मनाया जायेगा।

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इन जगहों पर मनाया जाता है महोत्सव

आईये आगे बताते चलें कि मां नंदा देवी महोत्सव किन -किन जगहों पर मनाया जाता है । यह अल्मोडा़,बागेश्वर, नैनीताल,डीडीहाट,लोहाघाट,मुन्स्यारी, जोशीमठ,कुरुड़, दसोली,घनशाली आदि जगहों पर मां नंदा देवी के पूजा स्थल व प्राचीन मंदिर है।इन जगहों पर हर साल अलग अलग तरीके से मां नंदा सुनंदा की पूजा व अर्चना की जाती  है। इस महोत्सव में मातृ शक्ति का बहुत बड़ा योगदान होता है।

मां नदा देवी हिमालय की बेटी माँ पार्वती मां का स्वरूप

आईये पौराणिक कहावत के अनुसार मां नंदा देवी महोत्सव के बारे में आगे बताते चलें।यह महोत्सव अगस्त व सिंतबर के महीने में होता है । कुमांऊ में मां नंदा देवी की अलग अलग जगहों पर कुल देवी के नाम से भी मान्यता है।इधर प्राचीन काल से चमोली जिले के नौटी मंदिर को मां नंदा देवी का ससुराल माना जाता है।

नौटी से बधाण व कुरूड़ एरिया में मां नदा देवी मायका बताया जाता है। इसलिए हर साल लोकराजयात्रा व 12साल में राजयात्रा निकाली जाती है। ये डोली मां नंदा बधाण कुरूड़ से नौटी मंदिर में रखी जाती है।बताया जाता है कि मां नंदा 12 साल तक अपने मायके में थी उनको विदा करने के लिए महिलाओं ने पहाडों के रास्ते से डोली व साज के साथ नौटी मंदिर से डोली विसर्जित की।

मां नदा देवी को हिमालय की बेटी पार्वती मां का रुप बताया जाता है। इधर कुमांऊ में गवरा देवी के लिए यह मान्यता है कि गवरा माता भी पार्वती मां का स्वरूप है । गवरा देवी व महेश की मूर्ती बनाकर शिव व पार्वती की पूजा करके गवरा देवी को मायके विदा करने की प्रथा आज भी प्रचलित है। 

प्रताप सिंह नेगी ने बताया चाहे गवरा देवी हो चाहे मां नदा देवी हो चाहे सुनंदा देवी हो ये सब हिमालय की बेटी मानी जाती है।इन्हें  पार्वती मां का रुप माना जाता है।

उतराखंड को शिवजी का ससुराल व पार्वती मां का मायका इसलिए कहा जाता है।

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