धूमधाम से मनाया गया उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस रजत जयंती समारोह
उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के गौरवपूर्ण अवसर पर राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत में रविवार को उत्तराखंड राज्य रजत जयंती उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस उपलक्ष्य में उत्तराखंड की संस्कृति, विकास यात्रा, तथा समृद्ध विरासत को स्मरण करते हुए विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय जनता एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर लल्लन प्रसाद वर्मा जी ने पुष्प गुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर कुंदन राम (जिला पंचायत सदस्य) ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
उत्तराखंड का गठन एक लंबे आंदोलन का परिणाम था
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का गठन एक लंबे आंदोलन का परिणाम था, जिसमें मुख्य भूमिका 1990 के दशक की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना, बेरोजगारी, शिक्षा-स्वास्थ्य के अभाव और क्षेत्रीय अलगाव ने निभाई। 1994 के मसूरी, खटीमा और रामपुर तिराहा जैसे गोलीकांड राज्य आंदोलन के काले अध्याय बनकर सामने आए। शहीदों के इन बलिदानों का ही परिणाम था कि 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड भारत का 27वाँ राज्य बना।।
अति विशिष्ट अतिथि पूरन सिंह नेगी (क्षेत्र पंचायत सदस्य, बडगल भट्ट)
उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस का महत्व –
यह दिन उत्तराखंड की जनता के आत्मसम्मान, सांस्कृतिक पहचान, विकास की प्रगति और भाषा-संस्कृति संरक्षण का प्रतीक है।
विशिष्ट अतिथि: अशोक कुमार (ग्राम प्रधान सरल रौतेला)
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की इस देव-भूमि से अध्यात्म और शौर्य की परम्पराएं प्रवाहित होती रही हैं। भारत का यह पवित्र भूखंड अनेक ऋषि-मुनियों की तपस्थली रहा है।
सारस्वत अतिथि: गणेश पाठक (व्यापार मंडल अध्यक्ष शीतलाखेत अल्मोड़ा)
उन्होंने कहा कि पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, स्वास्थ्य-सेवा और शिक्षा के क्षेत्रों में राज्य ने सराहनीय प्रगति की है।
अति विशिष्ट अतिथि शीतलाखेत मॉडल के सलाहकार गजेंद्र पाठक
जंगल जमीन को बचाने के लिए आगे आना होगा
उन्होंने कहा कि हमें जल जंगल जमीन को बचाने के लिए आगे आना होगा और जान और तंत्र की सहभागिता से ही यह सब संभव हो सकता है इसलिए आओ हम सब मिलकर उत्तराखंड के इस प्राकृतिक सौंदर्य को और समृद्ध करें
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया, जिसके बाद बालिकाओं ने मुख्य अतिथियों के अभिनंदन में स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम संयोजक ने इस उल्लासित समारोह में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रस्ताविक भाषण दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के क्रम में महाविद्यालय की बालिकाओं ने सामूहिक नृत्य एवं एकल गायन प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष आकर्षण पारंपरिक कुमाऊनी नृत्य ‘झोड़ा’ रहा, जिसे बालिकाओं ने बड़े ही उत्साह के साथ प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर डॉ. प्रकाश चंद्र जांगी ने “उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष: उपलब्धियां एवं चुनौतियां” विषय पर अपने विचार रखे, जिस पर सभी ने चिंतन किया।
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि हमने राजनीतिक दृष्टि से पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से उद्योग की दृष्टि से पर्यटन की दृष्टि से तीर्थाटन की दृष्टि से बहुत तरक्की की है लेकिन अब संतुलित विकास किए जाने की अत्यंत आवश्यकता है जिससे पर्यावरण को क्षति न पहुंचे।
राज्य के विकास में युवाओं की भूमिका पर ज़ोर दिया
इसके पश्चात, मुख्य अतिथियों ने अपना उद्बोधन दिया और राज्य के विकास में युवाओं की भूमिका पर ज़ोर दिया।
समारोह के दौरान, 6 नवंबर से महाविद्यालय में चल रही विभिन्न सांस्कृतिक एवं अकादमिक प्रतियोगिताओं की विजेता छात्राओं को पुरस्कार वितरण एवं सर्टिफिकेट प्रदान किए गए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर एल. जी. वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। अंत में, प्रो0 अनुपमा तिवारी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया गया, और कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ।
इस अवसर पर उपस्थित जन
इस अवसर पर प्रो० एल पी वर्मा प्रो० अनुपमा तिवारी डॉक्टर सीमा प्रिया डॉ प्रकाश चंद्र जांगी डॉ दीपिका आर्या, डॉ० वसुंधरा लस्पाल, डॉ०छत्र सिंह कठायत, डॉ० राजेंद्र चंद्र पांडे, कमल सिंह बनकोटी हेमंत मनराल विनोद रतन आदि उपस्थित रहे।
