एसएसजे राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान रैगिंग के मामलों को लेकर फिर हो रही चर्चा 

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एसएसजे राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान रैगिंग के मामलों को लेकर फिर हो रही चर्चा 

अल्मोड़ा एसएसजे राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान (मेडिकल कॉलेज) अल्मोड़ा एक बार फिर रैगिंग के मामलों को लेकर चर्चा में है। राज्य का यह एकमात्र पर्वतीय मेडिकल कॉलेज रैगिंग की घटनाओं के चलते लगातार बदनाम होता जा रहा है, जिससे इसकी शैक्षणिक और प्रशासनिक छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का पहला मामला लगभग दो वर्ष पूर्व सामने आया था। इसके बाद आठ माह पहले वर्ष 2025 भी इसी तरह की घटना ने कॉलेज प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी। उस समय कॉलेज प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाते हुए जूनियर और सीनियर छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी मौके पर बुलाकर काउंसलिंग कराई थी। आपसी सहमति और समझौते के बाद उस मामले को रफा-दफा कर दिया गया था।

एंटी-रैगिंग कमेटी का भी है गठन

जनवरी 2022 में अस्तित्व में आया। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें हैं। स्थापना के वर्ष ही यहां एंटी-रैगिंग कमेटी का गठन भी किया गया था। बावजूद इसके, रैगिंग की घटनाओं का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। बीते वर्षों की तुलना में मामलों की पुनरावृत्ति यह संकेत दे रही है कि निगरानी और रोकथाम के प्रयास अपेक्षित स्तर पर प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं।

केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सतत निगरानी, संवेदनशीलता और जागरूकता कार्यक्रमों की भी जरूरत 

ताजा मामले में कॉलेज प्रशासन ने छह छात्रों पर जुर्माना लगाने और कुछ पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त संदेश देने के उद्देश्य से उठाया गया है। वहीं अभिभावकों और छात्र संगठनों का मानना है कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सतत निगरानी, संवेदनशीलता और जागरूकता कार्यक्रमों की भी जरूरत है।

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