Uttarakhand मां पूर्णागिरि के दर्शन कर लौट रही नाबालिग ने शिशु को दिया जन्म

चंपावत। जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां पूर्णागिरि के दर्शन कर लौट रही एक 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी ने एक अविकसित शिशु को जन्म दिया। जन्म लेने के तुरंत बाद ही इस नवजात शिशु की मौत हो गई।

यह घटना तब उजागर हुई जब मंदिर परिसर से नीचे उतरते समय किशोरी की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में उसे टनकपुर के उपजिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां उसने करीब छह महीने के समयपूर्व (प्रीमैच्योर) बच्चे को जन्म दिया।अस्पताल प्रशासन की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई। टनकपुर उपजिला अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. प्रभा जोशी ने बताया कि किशोरी ने करीब छह माह के अविकसित शिशु को जन्म दिया था, जिसे बचाया नहीं जा सका।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर ने डीएनए (DNA) जांच के लिए नवजात और किशोरी के नमूने सुरक्षित रख लिए हैं। टनकपुर कोतवाली के प्रभारी चेतन सिंह रावत ने बताया कि अस्पताल से मिली तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज कर ली है।यह पीड़ित किशोरी उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के अमरिया क्षेत्र की रहने वाली है। वह मंगलवार को अपने चाचा और चाची के साथ पूर्णागिरि धाम में माता के दर्शन करने के लिए उत्तराखंड आई थी।

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि घटना से जुड़ा मूल अपराध क्षेत्र पीलीभीत का जहानाबाद थाना इलाका है। इसी वजह से टनकपुर कोतवाली पुलिस ने कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए मामले की केस डायरी और जीरो एफआईआर को संबंधित उत्तर प्रदेश पुलिस थाने को हस्तांतरित (ट्रांसफर) कर दिया है।इस दर्दनाक और गंभीर घटना के बाद से पीड़िता के परिजन गहरे सदमे में हैं। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की पुलिस अब इस मामले में संयुक्त रूप से जांच को आगे बढ़ा रही है। जहानाबाद थाना पुलिस अब पीड़िता के गांव और आसपास के संदिग्धों से पूछताछ करेगी ताकि नाबालिग का यौन शोषण करने वाले असली आरोपी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद आरोपी के खिलाफ कोर्ट में वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ कड़ा केस तैयार किया जाएगा।

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