रेडियो की दुनिया से रूबरू हुए अदिति महाविद्यालय के विद्यार्थी

रेडियो की दुनिया से रूबरू हुए अदिति महाविद्यालय के विद्यार्थी

अलका सिन्हा ने साझा किए आकाशवाणी में 30 वर्षों के अनुभव, लाइव प्रसारण की चुनौतियों से कराया परिचित

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। अदिति महाविद्यालय में बुधवार को रेडियो प्रसारण की दुनिया, उसके इतिहास और कार्यप्रणाली से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की बीएचजे लैब स्थित कक्ष संख्या 35 में आयोजित कार्यक्रम में रेडियो जगत से जुड़ी अलका सिन्हा ने आकाशवाणी में अपने 30 वर्षों के कार्यानुभव साझा किए। कार्यक्रम का आयोजन प्रोफेसर माला मिश्र के निर्देशन में किया गया।

कार्यक्रम के दौरान अलका सिन्हा ने रेडियो प्रसारण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रेडियो में आवाज, भाषा और ध्वनि प्रभावों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने वर्ष 1982 में किए गए अपने एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि इसी अनुभव के दौरान माइक्रोफोन के प्रति उनका विशेष लगाव विकसित हुआ। उन्होंने कमलेश्वर के दूरदर्शन से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया और विद्यार्थियों को प्रसारण जगत की कार्यप्रणाली से अवगत कराया।

लाइव प्रसारण में समय और उच्चारण का विशेष महत्व

अलका सिन्हा ने लाइव प्रसारण की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि रेडियो कार्यक्रमों में निर्धारित समय का पालन, स्क्रिप्ट का सही ढंग से वाचन और स्पष्ट उच्चारण बेहद जरूरी हैं। लाइव प्रसारण के दौरान प्रस्तोता को सतर्कता, एकाग्रता और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुति देनी होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए भाषा, आवाज में उतार-चढ़ाव और समय प्रबंधन के महत्व से भी परिचित कराया।

स्वतंत्रता आंदोलन में कांग्रेस रेडियो की भूमिका पर चर्चा

व्याख्यान में स्वतंत्रता सेनानी उषा मेहता के योगदान पर भी चर्चा की गई। अलका सिन्हा ने बताया कि वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उषा मेहता ने गुप्त कांग्रेस रेडियो के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस रेडियो के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित समाचार और संदेश लोगों तक पहुंचाए जाते थे। उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1998 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया।

ध्वनियों के माध्यम से श्रोताओं की कल्पनाशक्ति को करता है सक्रिय

कार्यक्रम में रेडियो की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह आवाज, संवाद, संगीत और ध्वनि प्रभावों के माध्यम से श्रोताओं के मन में घटनाओं और पात्रों का चित्र प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से रेडियो नाटकों में संवाद अदायगी और ध्वनि प्रभावों के जरिए दृश्य रचने की कला महत्वपूर्ण होती है।

कार्यक्रम के दौरान अलका सिन्हा के साथ एक पॉडकास्ट भी तैयार किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर माला मिश्र ने उन्हें पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त, अलका सिन्हा ने महाविद्यालय की ऑडियो-वीडियो लैब का निरीक्षण किया और उसके रचनात्मक उपयोग के लिए संबंधित टीम की सराहना की।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को रेडियो के इतिहास और उसकी व्यावहारिक कार्यप्रणाली से परिचित कराना था। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि प्रभावी रेडियो प्रसारण केवल बोलने की कला नहीं, बल्कि तैयारी, अनुशासन, भाषा और जिम्मेदारी का समन्वय है।

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