फ्री राशन योजना पर पुनर्विचार की उठी मांग, युवाओं के रोजगार पर खर्च करने का सुझाव
अल्मोड़ा, 2 नवंबर। मुफ्त राशन योजना को लेकर प्रताप सिंह ने सरकार से पुनर्विचार करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि मुफ्त राशन पर बढ़ती निर्भरता के चलते लोगों की खेती-किसानी के प्रति रुचि कम हो रही है, जिसका असर ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि पर भी दिखाई दे रहा है।
प्रताप सिंह का कहना है कि अल्मोड़ा सहित उत्तराखंड के कई ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले 15 से 20 वर्षों के दौरान खेती योग्य भूमि का बड़ा हिस्सा बंजर होता गया है। उनके अनुसार, पहले अधिकांश परिवार अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर रहते थे और युवा भी कृषि कार्यों में भागीदारी करते थे, लेकिन अब खेती के प्रति लोगों का रुझान कम होता जा रहा है।
उन्होंने सरकार से मुफ्त राशन योजना की समीक्षा कर इसे धीरे-धीरे बंद करने पर विचार करने की मांग की। साथ ही सुझाव दिया कि इस योजना पर खर्च होने वाली धनराशि का उपयोग युवाओं और युवतियों के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने में किया जाए।
प्रताप सिंह के अनुसार, यदि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो इससे पलायन पर अंकुश लगाने के साथ ही खेती-किसानी को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार हों।
हालांकि, मुफ्त राशन योजना और कृषि भूमि के बंजर होने के बीच संबंध को लेकर उनके विचार व्यक्तिगत हैं। इस विषय पर व्यापक अध्ययन और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता है।
