बंदर या इंसान, आतंक किसका? पढ़िए डा. ललित योगी की लिखी कविता ‘हमारे पेड़ रेंत दिए’
बंदर या इंसान, आतंक किसका? पढ़िए ड़ा. ललित योगी की लिखी कविता ‘हमारे पेड़ रेंत दिए’ हमारे पेड़ रेंत दिए…
बंदर या इंसान, आतंक किसका? पढ़िए ड़ा. ललित योगी की लिखी कविता ‘हमारे पेड़ रेंत दिए’ हमारे पेड़ रेंत दिए…
प्राण ऊर्जा केवल जीवन काल तक ही सीमित नहीं रहती- योगेश गहतोड़ी भावपल्लवन श्लोक:- धनञ्जयो मृते देहे स्थित्वा देहं न…
डा. ललित योगी की लिखी चुनिंदा कविताओं का संग्रह तीन माह की उपज कहूँ या फिर कहूँ मन की आवाज।…
नदियां हत्यारन कैसे हुई? नदियां नहीं उजाड़ती आशियाने!नदियों के मुहाने-किनारे पर।उगे हुए ईंट कंकड़ों के जंगल,रोकते हैं नदियों के वेग…
ता छुमा का छुम: एसएसजेयू के शिक्षक डा. योगी योगी का लिखा व रंगकर्मी ममता वाणी भट्ट का निर्देशित गीत…
जिंदगी की दौड़.. 🖋️ न जाने क्यों भाग रहे हैं हम!सड़कों पर भागती हुई गाड़ियों की तरहतेज घूमते हुए चक्के…