नदियां हत्यारन कैसे हुई?
नदियां नहीं उजाड़ती आशियाने!
नदियों के मुहाने-किनारे पर।
उगे हुए ईंट कंकड़ों के जंगल,
रोकते हैं नदियों के वेग को।
अपने साथ लाई गाद-मिट्टी को,
बिछाती है मुहाने-किनारे पर
इंसान बना देते हैं उन जगहों में,
अपने आलीशान आशियाने।
नदियां जब अपने पूर्वपथ पर,
निरंतर आगे बढ़ती-बहती है।
वो बंद किये हुए मुहाने देख,
ढूंढती और खोजती है रास्ता।।
अपने पथ पर अतिक्रमण देख,
दिखाती है भयावह रौंद्ररूप।
और रौंदकर चली जाती है,
इंसानों के बसाए घरौंदे को।।
इंसान नदियों को कोसते हैं,
पर वो ये नहीं देखते-
उसके पथ पर उगाए गए,
ईंट-कंकड़ों के अनगिनत जंगल।
लोग नदी को हत्यारन, डायन
और काल कहकर कोसते हैं!
नदियां जब जीवनदायिनी हैं,
तो फिर वो हत्यारन कैसे हुई?
डॉ. ललित योगी
