पेट्रोल पंपों पर मिट्टी के तेल की बिक्री को सरकार की मंजूरी

पेट्रोल पंपों पर मिट्टी के तेल की बिक्री को सरकार की मंजूरी

भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट के बीच एक महत्वपूर्ण और त्वरित निर्णय लेते हुए देशभर में चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर केरोसीन की बिक्री की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं में अस्थिरता बढ़ रही है और इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है। इस कदम का उद्देश्य विशेष रूप से उन वर्गों को राहत प्रदान करना है जो अभी भी खाना पकाने और प्रकाश के लिए केरोसीन पर निर्भर हैं।

इन राज्यों के लिए मिली अनुमति

यह निर्णय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा एक राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया है, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को २१ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले केरोसीन (एसकेओ) की आपूर्ति पेट्रोल पंपों के माध्यम से करने की अनुमति दी गई है। इसमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्य शामिल हैं, जहां पहले केरोसीन वितरण को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया गया था।

यह केवल एक आपातकालीन व्यवस्था नहीं बल्कि एक व्यापक ऊर्जा प्रबंधन दृष्टिकोण का हिस्सा

सरकार का यह कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह वैश्विक संकट के बीच घरेलू ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय और लचीली रणनीति अपना रही है। यह केवल एक आपातकालीन व्यवस्था नहीं बल्कि एक व्यापक ऊर्जा प्रबंधन दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में ऊर्जा उपलब्धता को बनाए रखना और कमजोर वर्गों को प्रभावित होने से बचाना है।

इस नई व्यवस्था के तहत, प्रत्येक जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को केरोसीन स्टॉक और बिक्री की अनुमति दी जाएगी, और प्रत्येक पंप अधिकतम ५००० लीटर तक केरोसीन रख सकेगा। यह सीमा इस बात को सुनिश्चित करने के लिए तय की गई है कि वितरण संतुलित रहे और किसी एक स्थान पर अत्यधिक भंडारण के कारण जोखिम न बढ़े। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे इन पेट्रोल पंपों की पहचान करें और वितरण प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करें।

अस्थायी रूप से लागू 

इस नीति की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे अस्थायी रूप से लागू किया गया है। यह प्रावधान ६० दिनों के लिए प्रभावी रहेगा या फिर सरकार द्वारा अगले आदेश तक जारी रहेगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर नीति में बदलाव करने के लिए तैयार है। यह लचीलापन वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में बेहद महत्वपूर्ण है।

सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए पेट्रोलियम नियम, २००२ के कुछ प्रावधानों में भी छूट दी है। इन छूटों के तहत केरोसीन के भंडारण और परिवहन से जुड़े लाइसेंसिंग नियमों को सरल किया गया है, जिससे वितरण प्रक्रिया में आने वाली प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी। हालांकि, सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया गया है और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य रहेगा।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से ईरान से जुड़े घटनाक्रम, ने वैश्विक तेल बाजारों को अस्थिर कर दिया है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में अनिश्चितता ने कई देशों के लिए ऊर्जा प्रबंधन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इस स्थिति से सीधे प्रभावित होता है। ऐसे में केरोसीन जैसे वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

लास्ट माइल डिलीवरी” को मजबूत करना है उद्देश्य

इस निर्णय का एक प्रमुख उद्देश्य अंतिम छोर तक वितरण यानी “लास्ट माइल डिलीवरी” को मजबूत करना है। पेट्रोल पंपों का नेटवर्क देशभर में व्यापक रूप से फैला हुआ है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि केरोसीन आसानी से और जल्दी लोगों तक पहुंचे। यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां पारंपरिक वितरण प्रणाली कमजोर है या जहां आपूर्ति में बाधा आ रही है।

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