पिथौरागढ बड़ालू गांव की बेटी निकिता चंद ने कजाकिस्तान में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। संसाधनों की कमी के बावजूद उत्तराखंड की होनहार बेटियां खेलों की दुनिया में खूब नाम कमा रही हैं। पिथौरागढ़ के बड़ालू गांव की रहने वाली निकिता चंद ऐसी ही होनहार बेटियों में से एक हैं। बकरी पालक पिता की इस होनहार बिटिया ने महज 8 साल की उम्र में ही मुक्केबाजी को अपना लक्ष्य बना लिया था, और गांव से निकलकर एशियन चैंपियनशिप तक का सफर तय किया।
निकिता की सफलता के बारे में सुन भावुक हुए पिता
मूनाकोट के बड़ालू गांव में किसान परिवार में जन्मी निकिता चंद का परिवार आज भी गरीबी में जीवन जीता है। पिता सुरेश चंद खेती-बाड़ी और बकरी पालन कर परिवार का पेट भर रहे हैं। जब गाँव के प्रधान डीडी जोशी ने निकीता चंद की इस सफलता के बारे मे पिता सुरेश चंद को बताया तो वो भावुक हो गये। निकिता की इस सफलता पर समूचे पिथौरागढ़ वड्डा क्षेत्र और बडालू मे खुशी की लहर है ।
2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में पदक जीतना है लक्ष्य
2015 में महज नौ साल की निकिता चंद कुछ करने की चाहत लेकर अपने चाचा विजेंद्र मल्ल के घर पिथौरागढ़ आ गईं। उनके चाचा ने उन्हें चौथी कक्षा में दाखिला दिलाया। अपने चाचा को एक मुक्केबाज से लड़ते हुए देखकर निकिता को मुक्केबाजी से प्यार हो गया और निकिता ने अपने चाचा को बताया।2016 में, उनके चाचा ने अन्य मुक्केबाजों के साथ निकिता को मुक्केबाजी का प्रशिक्षण देना शुरू किया। ट्रेनिंग के बाद निकिता ने 2019 में नेशनल स्कूल में कांस्य पदक जीता। निकिता ने सोनीपत में 2021 नेशनल जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। 2021 में ही निकिता ने दुबई में जूनियर एशियन चैंपियनशिप और मार्च 2022 में जॉर्डन में एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। निकिता ने अगस्त 2022 में मणिपुर में आयोजित नेशनल जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप भी जीती।बता दें कि अब निकिता का लक्ष्य 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में पदक जीतना है। वह इसके लिए तैयारी कर रही हैं।
