विज्ञान केंद्रों में सशक्त नेटवर्किंग व्यवस्था होगी विकसित, राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन का समापन

विज्ञान केंद्रों में सशक्त नेटवर्किंग व्यवस्था होगी विकसित, राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन का समापन

अल्मोड़ा में 21 वें राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन का समापन हो गया है। जिसमें देशभर के विज्ञान केंद्रों और संग्रहालयों के लिए स्पष्ट, दूरगामी और भविष्य उन्मुख रोडमैप प्रस्तुत किया गया। इस दौरान सम्मेलन में देश के सभी विज्ञान केंद्रों के बीच ज्ञान के आदान प्रदान के लिए सशक्त नेटवर्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

देशभर के विज्ञान केंद्रों के बीच एक सशक्त नेटवर्किंग व्यवस्था विकसित की जाएगी

   रविवार को सम्मेलन में वक्ताओं ने विज्ञान केंद्रों को पारंपरिक प्रदर्शनों से आगे बढ़कर ऐसे जीवंत और अनुभवात्मक मंचों के रूप में विकसित करने, शोध परियोजनाओं को समाज से जोड़ने, युवाओं को विज्ञान आधारित स्वरोजगार, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार की ओर प्रेरित करने पर भी जोर दिया। तय किया कि देशभर के विज्ञान केंद्रों के बीच एक सशक्त नेटवर्किंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए साझा फोरम का गठन होगा। इससे विज्ञान केंद्रों के बीच ज्ञान, अनुभव, संसाधनों और नवाचारी विचारों का प्रभावी आदान-प्रदान संभव हो सकेगा। विज्ञान संचार को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए 3-डी फिल्मों की एक साझा राष्ट्रीय लाइब्रेरी तैयार की जाएगी। सभी विज्ञान केंद्रों के साथ साझा किया जाएगा। इससे विज्ञान को सरल, रोचक और व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। यहां उप महानिदेशक राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद अनुराग कुमार, पूर्व महानिदेशक राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद जीएस रौतेला, निदेशक राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र दिल्ली विजय शंकर शर्मा, निदेशक राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद राजीव नाथ, छत्तीसगढ़ केंद्र के डीजी प्रशांत काविश्वर समेत विभिन्न विज्ञान केंद्रों के प्रमुख व विशेषज्ञ मौजूद रहे।

घोषणा पत्र किया गया जारी

अल्मोड़ा। सम्मेलन की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में विज्ञान संप्रेषकों के लिए ‘अल्मोड़ा घोषणा-पत्र’ जारी करने की घोषणा की गई, जिसे विज्ञान संचार के क्षेत्र में एक नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है। सम्मेलन के समापन अवसर पर मानसखण्ड विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद, कोलकाता के मार्गदर्शन एवं सहयोग तथा उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर यू-कॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन की विशेष सराहना की गई।

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