Uttarakhand राज्य में संस्कृत आयोग के गठन की तैयारी शुरू
उत्तराखंड सरकार संस्कृत भाषा के संरक्षण और विकास के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में संस्कृत आयोग के गठन की तैयारी शुरू कर दी गई है। आयोग को प्रभावी और व्यापक बनाने के लिए सरकार ने देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों और संस्कृत से जुड़े संस्थानों से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक लोग 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।
संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखंड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा देकर देश में नई पहल की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2025 में हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के दौरान संस्कृत के संरक्षण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग बनाने की जरूरत पर जोर दिया था। अब सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
प्रस्तावित आयोग संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने, शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक और शास्त्रीय अध्ययन, संस्कृत आधारित कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर काम करेगा। इसके अलावा प्रशासन, तकनीकी क्षेत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे आधुनिक क्षेत्रों में संस्कृत के उपयोग की संभावनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान में संस्कृत का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं…बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। राज्य सरकार का प्रयास है कि संस्कृत को आधुनिक समय के अनुरूप नई पहचान मिले और अधिक से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच बने।
