धनुष यज्ञ और लक्ष्मण-परशुराम संवाद के मंचन ने मोहा दर्शकों का मन
महानगर रामलीला में अहिल्या उद्धार, गौरी पूजन और कैकेयी-मंथरा संवाद का हुआ सजीव मंचन
लखनऊ। श्री रामलीला समिति, महानगर की ओर से आयोजित 61वें रामलीला महोत्सव में गुरुवार को अहिल्या उद्धार, गौरी पूजन, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और कैकेयी-मंथरा संवाद का मंचन किया गया। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने दर्शकों को प्रभावित किया। प्रमुख प्रसंगों के दौरान दर्शक दीर्घा ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठी।
रामलीला में पुष्प वाटिका में श्रीराम के दर्शन के बाद माता सीता द्वारा माता गौरी से राम जैसे पति की कामना करने और माता गौरी द्वारा उन्हें आशीर्वाद देने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसके बाद धनुष यज्ञ का मंचन हुआ। सभा में उपस्थित राजा जब शिव धनुष को उठाने में असफल रहे, तो राजा जनक निराश हो गए। इस पर लक्ष्मण ने जनक के कथन पर आपत्ति जताई। श्रीराम ने उन्हें शांत कराया और स्वयं धनुष को स्पर्श करते ही उसे तोड़ दिया।
धनुष टूटने की सूचना मिलने पर भगवान परशुराम क्रोधित होकर सभा में पहुंचे। लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुए संवाद ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। श्रीराम के वास्तविक स्वरूप को पहचानने के बाद परशुराम ने उनकी प्रशंसा करते हुए आशीर्वाद दिया।

वहीं, अयोध्या में श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों के बीच मंथरा ने रानी कैकेयी को अपने प्रभाव में लेकर राजा दशरथ से दो वरदान मांगने के लिए प्रेरित किया। मंथरा ने कैकेयी को भरत के राज्याभिषेक और श्रीराम को वनवास भेजने के लिए उकसाया। इस प्रसंग के माध्यम से रामलीला में आगे आने वाली घटनाओं की भूमिका प्रस्तुत की गई।
रामलीला में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
समिति के महासचिव हेम पन्त ने बताया कि रामलीला के मंचन में महिलाएं अभिनय के साथ-साथ आयोजन में भी सक्रिय सहयोग कर रही हैं। इनमें नृत्य निर्देशिका भारती पांडे के साथ भावना लोहनी, हेमा तिवारी, चित्रा पांडे, मंजू पडलिया शर्मा और सुजाता शर्मा प्रमुख रूप से शामिल हैं।
गुरुवार की लीला में राम की भूमिका यशी लोहुमी, लक्ष्मण की फाल्गुनी लोहुमी, सीता की अनुराधा मिश्रा, जनक की हरीश लोहुमी, जनक पत्नी की भावना लोहुमी, रावण की भास्कर जोशी, बाणासुर की कमल सिंह नेगी, परशुराम की नवीन पांडे, मंथरा की राधिका बोरा और कैकेयी की आशा रावत ने निभाई।
आज के प्रमुख प्रसंग
शुक्रवार को रामलीला में दशरथ-कैकेयी संवाद, राम-सीता संवाद, राम-लक्ष्मण संवाद, राम वन गमन, केवट प्रसंग, सुमंत विलाप और दशरथ देहावसान का मंचन किया जाएगा। कार्यक्रम रात आठ बजे से शुरू होगा।
