Shri kedarnath ji ki aarti श्री केदारनाथ जी की आरती lyrics
केदारनाथ धाम में प्रचलित “ॐ जय गंगाधर हर” आरती को भगवान शिव/गंगाधर की आरती के रूप में गाया जाता है। इसके अलग-अलग पाठों में कुछ शब्दों का मामूली अंतर मिलता है। नीचे प्रचलित पूर्ण पाठ दिया है।
🕉️ श्री केदारनाथ जी की आरती
जय केदार उदार शंकर, मन भयंकर दुःख हरम्।
गौरी गणपति स्कंद नंदी, श्री केदार नमाम्यहम्॥
शैल सुंदर अति हिमालय, शुभ मंदिर सुंदरम्।
निकट मंदाकिनी सरस्वती, जय केदार नमाम्यहम्॥
उदक कुंड है अधम पावन, रेतस कुंड मनोहरम्।
हंस कुंड समीप सुंदर, जय केदार नमाम्यहम्॥
अन्नपूर्णा सह अपर्णा, काल भैरव शोभितम्।
पंच पांडव द्रौपदी सह, जय केदार नमाम्यहम्॥
शिव दिगंबर भस्मधारी, अर्धचंद्र विभूषितम्।
शीश गंगा कंठ फणिपति, जय केदार नमाम्यहम्॥
कर त्रिशूल विशाल डमरू, ज्ञान गान विशारदम्।
मध्य महेश्वर तुंग ईश्वर, रुद्र कल्प महेश्वरम्॥
पंच धन्य विशाल आलय, जय केदार नमाम्यहम्।
नाथ पावन हे विशालम्, पुण्यप्रद हर दर्शनम्॥
जय केदार उदार शंकर, पाप ताप नमाम्यहम्॥
🙏 हर हर महादेव
🔱 जय बाबा केदारनाथ
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2.
ॐ जय गंगाधर जय हर, जय गिरिजाधीशा।
त्वं मां पालय नित्यं, कृपया जगदीशा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कैलासे गिरिशिखरे, कल्पद्रुमविपिने।
गुञ्जति मधुकरपुञ्जे, कुञ्जवने गहने॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कोकिलकूजित खेलत, हंसावन ललिता।
रचयति कलाकलापं, नृत्यति मुदसहिता॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
तस्मिंल्ललितसुदेशे, शाला मणिरचिता।
तन्मध्ये हरनिकटे, गौरी मुदसहिता॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
क्रीडा रचयति भूषारञ्जित निजमीशम्।
इन्द्रादिक सुर सेवत, नामयते शीशम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
बिबुधवधू बहु नृत्यत, नामयते मुदसहिता।
किन्नर गायन कुरुते, सप्त स्वर सहिता॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
धिनकत थै थै धिनकत, मृदंग वादयते।
क्वण क्वण ललिता वेणुं, मधुरं नाटयते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
रुण रुण चरणे रचयति, नूपुरमुज्ज्वलिता।
चक्रावर्ते भ्रमयति, कुरुते तां धिक तां॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
तां तां लुप चुप तां तां, डमरू वादयते।
अंगुष्ठांगुलिनादं, लासकतां कुरुते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
कर्पूरद्युतिगौरं, पंचाननसहितम्।
त्रिनयनशशिधरमौलिं, विषधरकण्ठयुतम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
सुन्दरजटायकलापं, पावकयुतभालम्।
डमरुत्रिशूलपिनाकं, करधृतनृकपालम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
मुण्डै रचयति माला, पन्नगमुपवीतम्।
वामविभागे गिरिजारूपं, अतिललितम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
शंखनिनादं कृत्वा, झल्लरि नादयते।
नीराजयते ब्रह्मा, वेदऋचां पठते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
सुन्दरसकलशरीरे, कृतभस्माभरणम्।
श्री वृषभध्वजरूपं, तापत्रयहरणम्॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
ध्यानं आरति समये, हृदये अति कृत्वा।
रामस्त्रिजटानाथं, ईशं अभिनत्वा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
संगतिमेवं प्रतिदिन, पठनं यः कुरुते।
शिवसायुज्यं गच्छति, भक्त्या यः श्रृणुते॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
ॐ जय गंगाधर जय हर, जय गिरिजाधीशा।
त्वं मां पालय नित्यं, कृपया जगदीशा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
