राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामय विचार गोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित
राजकीय महाविद्यालय लमगड़ा में दिनांक 11 नवम्बर 2025 को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामय विचार गोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो० कमरूददीन द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ० रेनू असगोला एवं संयोजन डॉ० हेमन्त कुमार बिनवाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ सरस्वती माँ की फोटो के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर हुआ | तत्पश्चात महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया । तत्पश्चात डॉ० हेमन्त कुमार बिनवाल (कार्यक्रम संयोजक) द्वारा अतिथियों एवं उपस्थित जनों का स्वागत एवं गोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया।
कर्तव्यनिष्ठ नागरिक होना आवश्यक
अपने विषय उद्बोधन में डॉ० हेमन्त कुमार बिनवाल ने कहा कि शिक्षा किसी राष्ट्र की आर्थिक शक्ति, सामाजिक चेतना एवं सांस्कृतिक बुनियाद का मूल स्रोत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का युवा केवल डिग्रीधारी न होकर मूल्य-आधारित, नैतिक, जागरूक, नवाचार-क्षम और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि -जब शिक्षा चरित्र निर्माण से जुड़ती है, तब वही शिक्षा राष्ट्र को सशक्त बनाती है। शिक्षा केवल जीविका प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र निर्माण का साधन है। वक्तव्य में विशेष रूप से NEP 2020 में कौशल शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, उद्यमिता और भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन की प्रासंगिकता पर जोर दिया गया।
मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया
डॉ० कमलेश कुमार द्वारा युवाओं में नैतिक, सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। गोष्ठी में महाविद्यालय के गौरव सिंह बिष्ट, राहुल ढेला, मोहिता ढेला, ख़ुशी तिवारी, सोनी , विनीता लोहनी छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक अपने विचार व्यक्त किए। छात्रों ने शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के संबंध, युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारियों, पर्यावरण, डिजिटल नागरिकता और आत्मनिर्भर भारत में युवा शक्ति के महत्व पर सार्थक विचार प्रस्तुत किए।
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में शिक्षा का मूल उद्देश्य
प्राचार्य प्रो०कमरूददीन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ० मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के शिक्षा दर्शन, राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक समरसता के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में शिक्षा का मूल उद्देश्य समावेशी विकास और युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम की भावना का विकास होना चाहिए।युवाओं को चाहिए कि वे निरंतर ज्ञानार्जन करें, अपने कौशल और क्षमताओं को विकसित करें तथा जीवन में ऐसे श्रेष्ठ पदों को सुशोभित करें, जो न केवल उनके व्यक्तिगत विकास बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान में भी सहायक हों।
इस अवसर पर उपस्थित जन
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ० रेनू जोशी, श्री सिद्दार्थ कुमार गौतम, श्री नरेन्द्र आर्य डॉ० कमलेश कुमार, श्री धर्मेन्द्र सिंह नेगी, रेनू असगोला, श्री दीपक कुमार सहित महाविद्यालय क कार्यालय-स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
