आमलकी एकादशी आज, जानें तिथि समय और पौराणिक कथा

आमलकी एकादशी आज, जानें तिथि समय और पौराणिक कथा

आज का दिन यानी आमलकी एकादशी का दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। यह अवसर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह एकादशी करने से सैंकड़ों तीर्थ दर्शन के समान पुण्य प्राप्त होता है। इतना ही नहीं इस व्रत को करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो लोग आमलकी एकादशी का व्रत नहीं करते हैं उन्हें भी इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु को आंवला जरूर अर्पित करना चाहिए और स्वयं भी इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

तिथि और समय

एकादशी – शुक्रवार, 27 फरवरी, 2026 

एकादशी तिथि प्रारंभ – 27 फरवरी, 2026 को रात्रि 12:33 बजे 

एकादशी तिथि समाप्त – 27 फरवरी, 2026 को रात्रि 10:32 बजे 

पारणा समय (व्रत तोड़ने का) – 28 फरवरी, 2026 को सुबह 06:47 से 09:06 बजे तक 

पारणा की अवधि – 2 घंटे 19 मिनट

जानें एकादशी कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वैदिक नामक नगर में एक चंद्रवंशी राजा राज्य करते थे। उनके नगर के लोग बड़े भक्त थे और एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा से करते थे। एक बार फाल्गुन मास की आमलकी एकादशी पर सभी लोग उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा कर रहे थे। उसी दौरान एक शिकारी वहां पहुंचा, जो भूखा-प्यासा था। वह पूरी रात वहीं रुका और भगवान की कथा सुनने लगा। कुछ समय बाद शिकारी की मृत्यु हो गई। पाप कर्मों के कारण उसे नरक में जाना पड़ा, लेकिन आमलकी एकादशी की कथा सुनने और जागरण करने के कारण उसे अगले जन्म में राजा विदूरथ के घर जन्म मिला। इस जन्म में उसका नाम वसुरथ रखा गया।एक दिन राजा वसुरथ जंगल में भटक गए और एक पेड़ के नीचे सो गए। तभी कुछ डाकुओं ने उन पर हमला कर दिया, लेकिन उनके अस्त्र-शस्त्र का उन पर कोई असर नहीं हुआ। राजा को कोई चोट नहीं आई, जबकि सभी डाकू मृत पड़े थे। जब राजा की नींद खुली तो उन्होंने यह दृश्य देखा। तभी आकाशवाणी हुई कि यह भगवान विष्णु की कृपा है। पिछले जन्म में किए गए आमलकी एकादशी व्रत और कथा सुनने के कारण राजा पर कोई संकट नहीं आया। जब राजा की आंख खुली, तो उन्हें पता चला कि यह चमत्कार केवल ‘आमलकी एकादशी’ के अनजाने में किए गए व्रत से उसे शुभ फल प्राप्त हुआ। 

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