महानगर रामलीला में छाया चित्रकूट का प्रसंग ‘भरत मिलाप’
लखनऊ श्री रामलीला समिति महानगर द्वारा आयोजित रामलीला में शनिवार को रामायण के कई अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
रामलीला का विधिवत उद्घाटन
मुख्य अतिथि मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत ने दीप प्रज्वलित कर रामलीला का विधिवत उद्घाटन किया। समिति के अध्यक्ष ललित मोहन जोशी महासचिव हेम पन्त, संरक्षक वी के जोशी, गिरीश जोशी, संजय श्रीवास्तव, संजय पांडे एवं श्रीमती भावना लोहानी ने पुष्प गुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया तत्पश्चात लीला मंचन का शुभारंभ हुआ।
सीता-वनस्त्री संवाद अरी तुम कौन हो रही से हुआ लीला का शुभारंभ
शनिवार की लीला का शुभारंभ सीता-वनस्त्री संवाद अरी तुम कौन हो रही, प्यारी वन वन डोल रही हो और भरत-कैकेई संवाद के साथ हुआ, जिसमें कैकेई के प्रति भरत का क्षोभ तेरे मन में कैसी कुमति बसी जो राम को वन दीन्हा और माता के प्रति उनका दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से झलका। इसके बाद मंच पर राम-भरत मिलाप (चित्रकूट) का वह अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे पंडाल को भावुक कर दिया। सूर्पनखा ने जंगल में राम लक्ष्मण को देख कर उन पर डोरे डालने के लिए आयी मेरा रूप देख कर चन्द्रमा शरमा गया और छिप गया लेकिन बात न बनने पर जैसे ही सीता जी पर आक्रमक हुई लक्ष्मण जी नहीं उसकी नाक काट दी खरदूषण प्रसंग दर्शन तो मिल गए अब लड़कर क्या करुं के बाद लंका पति रावण द्वारा सीता हरण का दृश्य दिखाया गया।
लीला के प्रमुख कलाकार
आज की लीला में प्रमुख कलाकार राम – यशी लोहुमी, लक्ष्मण- फाल्गुनी लोहुमी, सीता -अनुराधा मिश्रा, भरत- प्रतिष्ठा शर्मा, शत्रुघ्न- यशी शर्मा, कैकई- आशा रावत, सूर्पनखा -लविता हलोई, खर -पंकज त्रिपाठी, दूषण -राजेश त्रिपाठी, मारीच- मनीष उपाध्याय जोगी- रावण कमल पंत, रावण -भास्कर जोशी रामलीला के बीच में सूत्रधार की भूमिका में प्रसिद्ध उद्घोषक पंडित नारायण पाठक मानस की चौपाइयों से लोगों को मंत्र मुक्त कर देते हैं।
रामलीला में 18 अक्टूबर को यह कार्यक्रम होंगे आयोजित
रामविलाप, शबरी प्रसंग, राम सुग्रीव मैत्री, बाली सुग्रीव युद्ध, बाली उद्धार, सीता की खोज, अशोक वाटिका प्रसंग, हनुमान रावण संवाद, लंका दहन, रात 9:00 बजे।
