बुजुर्गों का सम्मान और सुरक्षा: केवल कर्तव्य नहीं, हमारा दायित्व- योगाचार्य कृष्ण अवतार


15 जून: आज ‘विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस’ है। यह विशेष दिन उन बुजुर्गों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाने और समाज को जागरूक करने के लिए समर्पित है, जो अपनों या समाज द्वारा किसी न किसी रूप में प्रताड़ना झेल रहे हैं। बुजुर्गों के साथ होने वाला दुर्व्यवहार—चाहे वह शारीरिक (Physical) हो, मानसिक (Mental) हो या मौखिक (Verbal)—एक अत्यंत जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है।


आज के दिन हम सभी को यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम वरिष्ठ नागरिकों को प्रताड़ना नहीं, बल्कि स्नेह, आदर और स्वाभिमान का जीवन देंगे। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि वे खुद को उपेक्षित या अकेला महसूस न करें। समाज के हर वर्ग में यह संवेदनशीलता जगानी होगी कि बुजुर्गों के प्रति हमारा व्यवहार और भाव हमेशा सम्मानजनक हो। उन्हें सर्वोपरि स्थान मिलना चाहिए, क्योंकि वे हमारे परिवार और समाज की नींव हैं।
बुजुर्ग उस बरगद की घनी छांव की तरह होते हैं, जो अपनी तपस्या से पूरे परिवार को शीतलता और सुरक्षा देते हैं। जब तक यह छांव हमारे सिर पर रहेगी, हमारा जीवन सुरक्षित और सुखी रहेगा। आइए, आज इस ‘विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस’ पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम मन, वचन और कर्म से कभी किसी बुजुर्ग का अपमान नहीं करेंगे, उन्हें निराश नहीं होने देंगे और उनके जीवन के अंतिम पड़ाव को खुशहाल और गरिमापूर्ण बनाएंगे।

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