महानगर रामलीला में शबरी के समर्पण से लेकर लंका दहन तक के जीवंत प्रसंगों ने मोहा मन
महानगर में चल रही श्री रामलीला में रविवार का मंचन दर्शकों के लिए अत्यंत भावुक, प्रेरणादायी और रोमांचक रहा। कलाकारों के सजीव अभिनय से सजी लीला के दौरान रामचरितमानस के कई प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया, जिसने पंडाल में मौजूद हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया। लीला में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल मुख्य अतिथि के रूप में पधारीं थी। उनका पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह देखकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से संरक्षक संजय श्रीवास्तव महासचिव हेम पन्त सहित वरिष्ठ पदाधिकारी मृत्युंजय पांडे, हिमांशु मिश्रा,आनन्द सिंह,नीरद लोहानी, घनानंद जोशी, श्रीमती भावना लोहानी विशेष रूप से उपस्थित थे।
शबरी प्रसंग रहा मुख्य आकर्षण
आज की लीला का मुख्य आकर्षण शबरी प्रसंग रहा, जिसमें भगवान श्रीराम की अगाध कृपा और भक्त के निश्चल प्रेम का अनूठा संगम देखने को मिला। जटायु उद्धार, शबरी की प्रतीक्षा और उनकी भक्ति भाव को दर्शाते हुए मंच पर मानस की इन अमर चौपाइयों को सस्वर प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया:
रामविलाप के मर्मस्पर्शी प्रसंग से दर्शकों की आंखें हुई नम
“कह कथा भगति कै गाई। निज पद राजत सबहि जनाई॥शबरी का मार्मिक अभिनय वयोवृद्ध कलाकार हेमा जोशी द्वारा किया गया साथी हनुमान का दमदार किरदार रामलीला के निर्देशक महेंद्र पन्त द्वारा किया गया।
इसके साथ ही, रामविलाप के मर्मस्पर्शी प्रसंग ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। आगे की लीला में हनुमान जी का राम जी से मिलन राम-सुग्रीव मैत्री, बाली-सुग्रीव युद्ध, और भगवान श्रीराम द्वारा बाली उद्धार का रोमांचक मंचन हुआ।
शाम ढलते-ढलते लीला ने नया मोड़ लिया, जिसमें सीता की खोज, अशोक वाटिका प्रसंग, सीताजी को हनुमान जी द्वारा अपना परिचय *मैं राम दूत कपि हनुमाना* देते हुए राम जी की अंगूठी देते हैं। हनुमान-रावण संवाद, और अंत में हनुमान जी के पराक्रम को दर्शाते हुए लंका दहन की भव्य लीला का मंचन किया गया।
दशहरा मेला कल, दो पुतलो का होगा दहन
समिति के मुख्य संयोजक दीपक पांडे दीनू ने बताया कि इस वर्ष विजय दशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर को रावण (45) और मेघनाथ (40) फुट के पुतलों का दहन आतिशबाजी के साथ रात्रि 8:00 बजे रामलीला मैदान में किया जाएगा।
