Aja ekadashi कब है अजा एकादशी, जाने समय और व्रत कथा
अजा एकादशी 2026 सब पापों का नाश व सहजता से स्वर्ग लोक की प्राप्ति हेतु किया जाता है । “अजा” शब्द का अर्थ “अजन्मा” या अविनाशी है, जो भगवान विष्णु को संदर्भित करता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत का पालन करने से पूर्व कर्म और पाप धुल जाते हैं।हिंदू धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि पूर्ण श्रद्धा के साथ इस व्रत को रखने से अश्वमेध यज्ञ करने के समान आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है।उपवास विचारों को सरल बनाने, आसक्तियों को कम करने और घर में शांति और समृद्धि लाने में मदद करता है।
अजा एकादशी 2026सोमवार, 7 सितंबर 2026 को है ।
तिथि समय
- एकादशी तिथि आरंभ: 6 सितंबर 2026, शाम 7:29 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 7 सितंबर 2026, शाम 5:03 बजे
पारना (व्रत तोड़ने का) समय
- दिनांक: 8 सितंबर, 2026, मंगलवार
- समय सीमा: सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे तक
प्रमुख अनुष्ठान
- पूजा: भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी के पत्ते अर्पित करके प्रार्थना करें।
- उपवास:अपनी सेहत और परंपरा के अनुसार निर्जला (बिना पानी के) या फलाहार (फल आधारित) उपवास रखें । अनाज और चावल से परहेज करें।
- जप:“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और अजा एकादशी व्रत कथा सुनें। [
अजा एकादशी व्रत कथा
एक बार युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण जी से भाद्रपद कृष्ण एकादशी व्रत की विधि अैर महत्व के बारे में बताने का निवेदन किया. इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि भाद्रपद कृष्ण एकादशी अजा एकादशी नाम से प्रसिद्ध है. इसकी कथा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है.एक समय धरती पर चक्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र का शासन था. किसी वजह से उनका राजपाट चला गया. ऐसी स्थिति बन गई कि पत्नी, बेटे और स्वयं को भी बेचना पड़ गया. राजा हरिश्चंद्र को एक चांडाल ने खरीदा. वे उसके यहां काम करते थे. राजा हरिश्चंद्र उसके सभी आदेश का पालन करते थे. मृतकों के वस्त्र लेते थे.लेकिन राजा हरिश्चंद्र हमेशा सत्य के मार्ग पर चलते रहे. जब वे एकांत में होते, तो अपनी पत्नी और पुत्र के दुखों के बारे में सोचते. उनसे मुक्ति का मार्ग सोचते रहते थे. वे वह उपाय जानना चाहते थे, जिससे उनके कष्ट दूर हो जाएं और उनका उद्धार हो जाए.राजा हरिश्चंद्र ने काफी समय तक ऐसे ही समय व्यतीत किया. एक दिन वह उदास और चिंतित बैठे थे, तभी वहां गौतम ऋषि आए. राजा हरिश्चंद्र ने उनको प्रणाम किया. फिर अपने दुखों से मुक्ति का मार्ग पूछा.गौतम ऋषि ने कहा कि हे राजन! तुम बहुत ही भाग्यशाली हो. ठीक आज से 7 दिन बाद भाद्रपद कृष्ण एकादशी है. उस दिन तुम विधि विधान से व्रत रखो और भगवान विष्णु की पूजा करो. हरि कृपा से ही तुम्हारा कल्याण होगा , सभी दुख दूर होंगे. यह उपाय बताने के बाद गौतम ऋषि वहां से चले गए.जिस दिन अजा एकादशी का व्रत था, उस दिन राजा हरिश्चंद्र ने विधि विधान से व्रत रखा. गौतम ऋषि की बताई विधि के अनुसार ही भगवान विष्णु की पूजा की, रात के समय जागरण किया. फिर अगली सुबह पारण करके व्रत को पूरा किया.राजा हरिश्चंद्र पर भगवान विष्णु की कृपा हुई. उनके सारे पाप और कष्ट नष्ट हो गए. स्वर्ग से फूलों की वर्षा होने लगी. उनका मरा हुआ पुत्र दोबारा जीवित हो गया, उनकी पत्नी रानी के समान हो गई थीं. अजा एकादशी व्रत के प्रभाव से ही राजा हरिश्चंद्र को खोया हुआ राजपाट और परिवार वापस मिल गया. मृत्यु के बाद राजा हरिश्चंद्र को स्वर्ग की प्राप्ति हुई.जो व्यक्ति विधि विधान से अजा एकादशी का व्रत करता है, राजा हरिश्चंद्र की तरह ही उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाता है।
