महानगर की रामलीला में इस बार भी दिखेगा पहाड़ की लोकसंस्कृति और शास्त्रीय संगीत का अनूठा संगम, महिला कलाकार निभाएंगी प्रमुख भूमिकाएं
लखनऊ: 14 अक्टूबर से शुरू होगा आठ दिवसीय रामलीला महोत्सव, पूर्वाभ्यास में जुटे कलाकार
लखनऊ। शारदीय नवरात्र के अवसर पर राजधानी लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाली रामलीलाओं की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। कलाकार अपने अभिनय को निखारने के लिए पूर्वाभ्यास (तालीम) में जुटे हैं। इसी क्रम में श्री रामलीला समिति महानगर की ओर से 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक आठ दिवसीय रामलीला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस रामलीला में पहाड़ की पारंपरिक गायन शैली, शास्त्रीय संगीत, संवाद और अभिनय का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
छह दशक से अधिक समय से कायम है परंपरा
श्री रामलीला समिति महानगर की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। वर्ष 1950 के दशक में अविभाजित उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों से लोग नौकरी और रोजगार की तलाश में लखनऊ पहुंचे। उनके साथ पहाड़ की कला और संस्कृति भी मैदानी क्षेत्रों तक पहुंची। इसी क्रम में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रचलित गायन और संवादों पर आधारित रामलीला ने लखनऊ में अपनी पहचान बनाई।
इस रामलीला की विशेषता संवादों के साथ शास्त्रीय राग-रागिनियों में गायन, दोहा, चौपाई, छंद और अभिनय का सुंदर समन्वय है। इसकी कथावस्तु मुख्यतः रामचरितमानस और राधेश्याम रामायण पर आधारित है। पारंपरिक गायन शैली के कारण यह रामलीला दर्शकों को विशिष्ट सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करती है।
नजरबाग से शुरू हुआ सफर, महानगर तक पहुंची परंपरा
आजादी के बाद लखनऊ में कुमाऊं परिषद की स्थापना हुई। परिषद की ओर से 1950 के दशक में नजरबाग में पहली बार रामलीला का आयोजन किया गया। इसके बाद अगले वर्षों में मुरलीनगर में कुमाऊंनी शैली की रामलीला होने लगी। धीरे-धीरे गणेशगंज, नरही, डालीगंज और महानगर जैसे क्षेत्रों में भी रामलीला के आयोजन शुरू हुए।
समय के साथ शहर का विस्तार हुआ और पर्वतीय समुदाय के लोग लखनऊ के अन्य क्षेत्रों में बसने लगे। इसके चलते मुरलीनगर, गणेशगंज, डालीगंज और नरही में रामलीला के आयोजन धीरे-धीरे बंद हो गए, जबकि तेलीबाग, कुर्मांचल नगर, पंतनगर, कल्याणपुर और गोमती नगर में पर्वतीय शैली की रामलीलाओं की परंपरा विकसित हुई।
इन बदलावों के बीच श्री रामलीला समिति महानगर ने छह दशक से अधिक समय से रामलीला महोत्सव के आयोजन की परंपरा को निरंतर बनाए रखा है। समिति के कलाकार प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर भी रामलीला का मंचन कर चुके हैं।
इस परंपरा को स्थापित करने और आगे बढ़ाने में समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक स्वर्गीय पंडित पूरन चंद्र पांडे ‘पूरन दा’ तथा रामलीला के प्रसिद्ध निर्देशक एवं कलाकार स्वर्गीय पीयूष पांडे का विशेष योगदान रहा है।
पर्वतीय रामलीला को समृद्ध बनाने में कलाकारों का योगदान
अवध क्षेत्र में पर्वतीय रामलीला की परंपरा को संवारने में अनेक संगीतकारों और कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें स्वर्गीय पीतांबर दत्त पांडे, स्वर्गीय प्रभु तिवारी, स्वर्गीय जगदीश चंद्र जोशी ‘बब्बा’, स्वर्गीय गिरजा शंकर पंत, स्वर्गीय दामोदर पांडे, स्वर्गीय कैलाश जोशी, स्वर्गीय रघुवर दत्त जोशी, स्वर्गीय सत्य प्रकाश जोशी, स्वर्गीय मोहन चंद्र तिवारी, स्वर्गीय राजीव जोशी, स्वर्गीय नलीनाक्ष जोशी, स्वर्गीय दीपेश त्रिपाठी, स्वर्गीय अशोक सिंह और स्वर्गीय ललित मोहन जोशी सहित अनेक कलाकारों का योगदान उल्लेखनीय रहा है।
हरीश पंत, राजकुमार जोशी, भाषा पंत और यतीश कापड़ी के जीवंत अभिनय को भी याद किया जाता है। प्रसिद्ध लोकगायिका विमल पंत और सूर्पनखा का प्रभावशाली अभिनय करने वाले कृष्ण कुमार पांडे ‘कन्हैया’ आज भी रामलीला के मंचन में सहयोग कर रहे हैं।
प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगी युवा महिला कलाकार
श्री रामलीला समिति महानगर की रामलीला की एक खास विशेषता यह है कि पिछले कुछ वर्षों से अधिकांश भूमिकाओं में महिला कलाकार भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।
समिति के मीडिया प्रभारी देवेंद्र मिश्रा के अनुसार, राम की भूमिका निभाने वाली यशी लोहुमी लखनऊ विश्वविद्यालय से बीटेक की पढ़ाई कर रही हैं। सीता की भूमिका अनुराधा मिश्रा निभाएंगी, जो स्नातक की छात्रा हैं। लक्ष्मण की भूमिका फाल्गुनी लोहुमी निभाएंगी, जो इंटरमीडिएट की अंतिम वर्ष की छात्रा हैं।
इसके अलावा भरत की भूमिका प्रतिष्ठा शर्मा, शत्रुघ्न की भूमिका यशी शर्मा और गौरी की भूमिका प्रसिद्ध जोशी निभाएंगी। ये सभी लखनऊ के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत हैं।
रामलीला के निर्देशक महेंद्र पंत निर्देशन की जिम्मेदारी संभालने के साथ हनुमान और केवट की भूमिका में भी नजर आएंगे। उनके सहयोगी सह-निर्देशक हरीश लोहुमी जनक और जटायु की भूमिका निभाएंगे। रावण के दमदार किरदार में भास्कर जोशी दिखाई देंगे।
अनुभवी कलाकार निभाएंगे महत्वपूर्ण पात्र
रामलीला में 77 वर्षीय हेमा जोशी सबसे वरिष्ठ कलाकार हैं, जो सभी की भूमिका निभाएंगी। गोमती नगर निवासी आशा रावत कैकेयी, राधिका बोरा मंथरा और भारती कांडपाल कौशल्या की भूमिका निभाएंगी। मनीष उपाध्याय विश्वामित्र और मारीच, कमल नेगी बाणासुर तथा अमित वर्मा कुंभकरण का अभिनय करेंगे।
दशरथ की भूमिका प्रसिद्ध कलाकार कुणाल पंत निभाएंगे, जबकि बाली की भूमिका सुमंत और जोगी रावण की भूमिका इंजीनियर कमल पंत निभाएंगे।
पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी नवीन पांडे परशुराम और अंगद की भूमिकाओं में नजर आएंगे। निजी क्षेत्र की फर्म में कार्यरत पंकज त्रिपाठी दूषण तथा प्रकाश चंद्र जोशी मेघनाद की भूमिका निभाएंगे। खर और सुग्रीव का अभिनय राजेश तिवारी, सूर्पनखा की भूमिका लविता होलोई और ताड़का की भूमिका कृतिका श्रीवास्तव निभाएंगी।
बाल कलाकारों को नृत्य का प्रशिक्षण भारती पांडे और उनके साथी दे रहे हैं।
संगीत और वेशभूषा पर विशेष ध्यान
रामलीला को प्रभावशाली बनाने के लिए संगीत पक्ष को भी विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। हारमोनियम पर ललित भट्ट, तबले पर दिवाकर राव, नीरज पंत और मृदु नंदन सनवाल तथा बांसुरी पर किशोर श्रीवास्तव संगत देंगे। गिटार के माध्यम से भी संगीत पक्ष को मजबूत बनाया जाएगा।
कलाकारों के अभिनय के साथ उनकी वेशभूषा और रूप-सज्जा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी हिमांशु मिश्रा संभाल रहे हैं।
समिति के पदाधिकारी तैयारियों में जुटे
समिति के अध्यक्ष ललित मोहन जोशी और महासचिव हेम पंत ने संयुक्त रूप से बताया कि कलाकार अपने रोजमर्रा के कार्यों के साथ रामलीला की तैयारियों में भी पूरी मेहनत से जुटे हुए हैं। आयोजन को सफल बनाने के लिए समिति के सभी सदस्य मिलकर कार्य कर रहे हैं।
मुख्य संयोजक दीपक पांडे ‘दीनू’ तथा संरक्षक फ्लाइंग ऑफिसर (सेवानिवृत्त) बीपी पांडे, जीसी सनवाल और संजय श्रीवास्तव के साथ समिति के पदाधिकारी विनोद पंत ‘बीनू’, नीरज लोहानी, आनंद सिंह, केके पांडे ‘कन्हैया’, घनानंद जोशी, बृजेश मेहता, तारा दत्त जोशी, मनोज निगम, सर्वजीत सिंह बोरा, संजय पांडे, मंजू पडेलिया शर्मा, भावना लोहानी, सुजाता शर्मा, हेमा तिवारी, चित्रा पांडे, हेमा पांडा और दीपेश पांडे सहित अन्य सदस्य आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे हैं।
श्री रामलीला समिति महानगर का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड की पर्वतीय संस्कृति, पारंपरिक संगीत और सामुदायिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
देवेंद्र मिश्रा
मीडिया प्रभारी, श्री रामलीला समिति महानगर, लखनऊ
