IRISE कार्यशाला का शुभारंभ, विज्ञान एवं गणित शिक्षकों ने सीखी नवाचारी शिक्षण तकनीकें

IRISE कार्यशाला का शुभारंभ, विज्ञान एवं गणित शिक्षकों ने सीखी नवाचारी शिक्षण तकनीकें

अल्मोड़ा, 4 अगस्त। IISER पुणे एवं SCERT उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में विज्ञान एवं गणित शिक्षकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय IRISE कार्यशाला का शुभारंभ मंगलवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), अल्मोड़ा में हुआ। कार्यशाला का शुभारंभ DIET अल्मोड़ा के प्राचार्य महेंद्र सिंह भंडारी एवं वरिष्ठ  प्रवक्ता डॉ  भुवन चंद्र पांडे  द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर कार्यशाला के जिला समन्वयक डॉ. कमलेश सिराड़ी, विषय विशेषज्ञों सहित जनपद के विभिन्न विद्यालयों से आए विज्ञान एवं गणित शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान एवं गणित जैसे विषयों को विद्यार्थियों के लिए अधिक रोचक, सरल एवं जीवनोपयोगी बनाने के लिए नवाचारी एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। IRISE कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली विभिन्न शिक्षण विधियों से परिचित कराया जा रहा है।

विभिन्न विषयों पर पांच महत्वपूर्ण सत्र आयोजित

कार्यशाला के प्रथम दिवस पर विभिन्न विषयों पर पांच महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र ‘कार्यशाला परिचय’ विषय पर विषय विशेषज्ञ अंकित जोशी द्वारा लिया गया, जिसमें प्रतिभागियों को IRISE कार्यशाला के उद्देश्यों, स्वरूप एवं अपेक्षित परिणामों से अवगत कराया गया।

द्वितीय सत्र

द्वितीय सत्र ‘मैथेमेटिकल कनेक्शन’ विषय पर देवेश कुमार तिवारी द्वारा संचालित किया गया। इस सत्र में गणितीय अवधारणाओं को दैनिक जीवन एवं अन्य विषयों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों में गणितीय सोच विकसित करने पर चर्चा की गई।

तृतीय सत्र 

तृतीय सत्र ‘केमिस्ट्री अराउंड अस’ विषय पर अंकित जोशी द्वारा लिया गया। सत्र में प्रतिभागियों ने अपने आसपास मौजूद विभिन्न दैनिक जीवन की घटनाओं एवं  वस्तुओं के पीछे छिपी रासायनिक अवधारणाओं को समझने तथा उन्हें कक्षा-कक्ष में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के तरीकों पर चर्चा की।

प्रतिभागियों ने विचार किए साझा

चतुर्थ सत्र ‘इकोसिस्टम’ विषय पर गिरीश चंद्र मठपाल द्वारा संचालित किया गया। इसमें पारिस्थितिकी तंत्र, जीवों एवं पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंधों तथा पर्यावरणीय अवधारणाओं को गतिविधियों के माध्यम से समझाने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला के प्रथम दिवस के अंतिम सत्र ‘रिफ्लेक्शन’ का संचालन निम्मी बिष्ट द्वारा किया गया। इस सत्र में प्रतिभागियों ने दिनभर के अनुभवों, गतिविधियों एवं सीख पर चिंतन करते हुए अपने विचार एवं अनुभव साझा किए तथा कार्यशाला से प्राप्त सीख को अपने विद्यालयों में लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

विभिन्न विषयों पर दिया जाएगा प्रशिक्षण 

कार्यशाला में शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए विभिन्न गतिविधियों एवं चर्चाओं में सक्रिय सहभागिता की। तीन दिवसीय कार्यशाला के आगामी सत्रों में भी विज्ञान एवं गणित शिक्षण को अधिक प्रभावी, नवाचारी, गतिविधि-आधारित एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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