अल्मोड़ा: जन नायिका कैप्टन लक्ष्मी सहगल की पुण्यतिथि पर नगरपालिका हॉल में गोष्ठी आयोजित


अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, भारत ज्ञान विज्ञान समिति डी वाई एफ आई के आह्वान पर सहयोगी संगठन , महिला समिति अल्मोड़ा, ग्रीन हिल्स द्वारा संयुक्त रूप से कैप्टेन लक्ष्मी सहगल की 11वीं पुण्य तिथि पर जन नायिका कैप्टन लक्ष्मी सहगल विषय पर नगरपालिका हॉल में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कैप्टन डा० लक्ष्मी सहगल के संघर्षों और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अथक योगदान को याद किया गया।
24अक्टुबर 1914 में जन्मी लक्षमी सहगल 1938 में अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर 1940 में सिंगापुर में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज की महिला शाखा,रानी झांसी रेजीमेंट, में कैप्टेन बनी देश को आज़ाद  कराने में उनकी अग्रणी भूमिका में रही। बाद के दौर में वह आजीवन अपनी मेडिकल सेवाएं गरीबों में मुफ्त में देती रही। 1981में जनवादी महिला समिति की संस्थापक सदस्य बन समिती के बैनर तले महिलाओं व वंचितों तबकों के हितों के लिए और समाज सुधार के मुद्दो पर काम करती रहीं। 1998में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया, 98वर्ष की उम्र तक वह कानपुर में गरीब लोगो को निशुल्क क्लीनिक सुविधाएं देते हुए 23जुलाई 2012को उनका निधन हो गया, उन्होंने अपना शरीर मेडिकल विद्यार्थियों के शोध के लिए दान कर दिया।

मणिपुर राज्य महीनों से हिंसा की आग में  जल रहा

वक्ताओं ने कहा की आज देश में गरीब मध्यमवर्गों, महिलाओं, विशेष वर्गों पर जनविरोधी नीतियां का चौतरफा हमला हो रहा है, मणिपुर राज्य महीनों से हिंसा की आग में  जल रहा ।मणिपुर की कूकी महिलाओं की बर्बर नग्न परेड व यौन हिंसा का भाजपा के “डबल इंजन शासन” की असलियत दुनियाभर ‌में उजागर हुईं है ।वैसे तो‌ प्रधानमंत्री देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप ही‌ रहते हैं किन्तु तीन माह से चले आ रही मणिपुर हिंसा पर इतने दिनों तक की चुप्पी ने इस अपराध की गंभीरता को और भी बढ़ा दिया है । जो बेहद शर्मनाक” है । मानवता के विरुद्ध हुए इन अमानवीय अपराधों और मणिपुर में शासन की पूर्ण विफलता के लिए मणिपुर के मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। मणिपुर में दो कुकी महिलाओं पर भीड़ द्वारा यौन हमले की वीभत्स घटना का सामने आया वीडियो  04 मई का है। मणिपुर के कांगपोकपी जिले में यह घटना उस वक्त घटित हुई, जब ये महिलाएं अपने परिजनों के साथ, उनके गांवों को आग लगाती भीड़ से बचाने के लिए नजदीकी इलाके में जाने की कोशिश कर रही थी ,इन महिलाओं के कपड़े उतार दिये गए और इन्हें नग्न अवस्था में घूमने के लिए मजबूर किया गया। इन महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार, ‘बदले’ की कार्यवाही के तौर पर किया गया।  रिपोर्ट तो यह भी है कि इन बलात्कार पीड़ित महिलाओं के पुरुष परिजनों की भीड़ ने हत्या कर दी। पुलिस या मणिपुर सरकार द्वारा इस भयावह घटना के मामले में बिना कार्यवाही किये ,दो महीने से अधिक बीत गए। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने पर तब जाकर एक  गिरफ्तारी  हुई और प्रधानमंत्री ने चुप्पी भी तभी तोड़ी। जबकि इस हिंसा में  लगभग 150 लोगों की मौत और हो चुकी है और जातीय हिंसा के चलते हज़ारों लोग अपनी जगहों से उजड़ चुके हैं ।  हम संयुक्त संगठन एकजुटता दिखाते हुए  घटना के अपराधियों के खिलाफ  तत्काल कार्यवाही की मांग  करते हैं कि:-

* सभी अपराधियों की तत्काल शिनाख्त कर, गिरफ़्तारी हो।। “अज्ञात ” भीड़ के नाम पर उन्हें बचाने की हर कोशिश का पर्दाफाश और प्रतिरोध करें।

* मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा दें।

* हिंसा और बलात्कार की ऐसी तमाम घटनाओं की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच दल भेजा जाए, जिसमें महिलावादी वकील शामिल हों. उक्त जांच दल, ऐसी सभी घटनाओं में मणिपुर पुलिस की कार्यवाही का जरूर संज्ञान ले। ब्रजभूषण सिंह की जमानत खारिज कर उसे कठोरतम दंड दिया जाय।
*हिंदू महिलाओं को खाली प्लॉट कहने वाले पाखंडी धीरेंद्र शास्त्री को गिरफ्तार किया जाय।
*उत्तराखंड समेत देश भर में लव जेहाद के नाम पर वर्ग विशेष पर हमले बंद किए जाय।
*अंकिता हत्याकांड के सभी आरोपियों  को तत्काल दण्डित किया जाय।
*महिला हिंसा विरोधी सभी कानूनों को उत्तराखंड सहित देश के सभी राज्यों में लागू किया जाय।

इस अवसर पर मौजूद रहे

गोष्ठी कार्यक्रम को भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य कोषाध्यक्ष प्रमोद तिवारी, उपाध्यक्ष नीरज पंत, जनवादी महिला समिती की राज्य अध्यक्ष सुनीता पांडे, डी वाई एफ आई के प्रदेश अध्यक्ष यूसुफ तिवारी, महिला समिती अल्मोड़ा की ज़िला उपाध्यक्ष भावना जोशी, बाल प्रहरी के उदय किरोला , सीटू के राजेन्द्र प्रसाद,  दीपा पांडे, कमला जोशी, मंजू पंत, राधा नेगी, सरस्वती, पार्वती, तारा पंत, भानू, दीक्षा, जया, भारती, मीना थापा, दीपक नगरकोटी ने सम्बोधित किया। गोष्ठी की अध्यक्षता समिती की अध्यक्ष चंदा राणा एवं संचालन ज़िला सचिव पूनम त्रिपाठी ने किया। गोष्ठी में मणिपुर की घटना के विरोध,जन स्वास्थ की बदहाल स्थिति के विरोध पर और चमोली की घटना के विरोध में प्रस्ताव सर्वसहमति से पारित किए गए।
         

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