फॉरेस्ट विस्प’ में प्रो सुशील कुमार जोशी के काव्य संग्रह ‘सरगोशियों का स्वर’ का विमोचन

अयारपानी (बिनसर) में फॉरेस्ट विस्प’ में सोबन सिंह जीना परिसर में रसायन विज्ञान के शिक्षक प्रो सुशील कुमार जोशी के काव्य संग्रह ‘सरगोशियों का स्वर’ का विमोचन हुआ। इस अवसर पर देव सिंह पोखरिया (पूर्व निदेशक, महादेवी सृजन पीठ), साहित्यकार प्रो जगत सिंह बिष्ट, प्रो नीरज तिवारी, कवि नवीन बिष्ट, साहित्यकार शंभु राणा, पत्रकार जगदीश जोशी, डॉ ललित योगी, डॉ पूरन जोशी, डॉ अरुण कलखुडिया, छाया चित्रकार जयमित्र सिंह, राष्ट्रपति पुरस्कार सम्मान से सम्मानित शिक्षक श्री उमेश पांडे, गौरव, खजान गुरुरानी सहित कई साहित्यकार उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम प्रो सुशील कुमार जोशी एवं प्रो. ज्योति जोशी ने साहित्यकारों का फॉरेस्ट विश्प में स्वागत किया। तदुपरांत पुस्तक लोकार्पण की शुरुआत हुई।
डॉ पूरन जोशी ने संचालन करते हुए कवि की पुस्तक पर प्रकाश डाला।
अपने उद्बोधन में प्रो देव सिंह पोखरिया ने कहा कि वर्तमान में कविता का स्वरूप बहुत अलग हो गया है। उन्होंने कहा कि सुशील जोशी की कविताएं विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होंगी। उनकी कविताएं समाज विज्ञान, प्रकृत विज्ञान, अन्तर्विज्ञान से जुड़ी होंगी। कवि जोशी की वैज्ञानिक सोच, सामाजिक सत्य को स्वीकार करते हुए जो कविताएं प्रकाश में आईं हैं। वह समाज के लिए मूल्यवान होंगी। उन्होंने कहा कि कवि को निरपेक्ष और निर्मम भाव से लिखना चाहिए। प्रो जोशी को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी कृतियाँ आती रहें।

प्रो जगत सिंह बिष्ट ने कहा प्रो सुशील कुमार जोशी की कविता संग्रह और उनकी कविताएं भाव, विचार, कल्पना,बुद्धि का संयोजन है। उन्होंने कहा कि इन कविताओं में समाज,संस्कृति, धर्म, रसायन, विज्ञान सभी कुछ है। उन्होंने आगे कहा कि एक कवि को अपने और समाज की व्यवस्थाओं के लिए निर्मम होना पड़ता है। उन्होंने अज्ञेय के साहित्य की चर्चा करते हुए कहा कि अज्ञेय भी विज्ञान के विद्यार्थी रहे हैं। वे अपने साहित्य में प्रयोगधर्मी रहे हैं। उन्होंने अपने साहित्य में बहुत प्रयोग किये हैं। ठीक ऐसे ही प्रो सुशील जी की कविताओं में भी कई प्रयोग हुए हैं। उनकी कविताएं भाव-भावोत्तेजना का संयोजन है। उनकी कविताओं में वैचारिकी झलकती है। रसायन का विद्यार्थी होने के बाद भी उनकी बहुत अच्छी कविता हैं। वे विसंगतियों को सामने लाते हैं।

कवि नवीन बिष्ट ने कहा कि सरगोशियों के स्वर कवि की कविता में ईमानदारी झलकती है। उनके लेखन में मुखरता है। वे बेवाकी से लिखते हैं। उनकी कविता सामने वाले व्यक्ति को उद्वेलित करती है। यही उनके संग्रह की सार्थकता है।

प्रो नीरज तिवारी ने कहा कि सुशील कुमार जोशी की कविताओं में प्रत्येक घटना का सार दिखाई देता है। इस संग्रह के लिए वे बधाई के पात्र हैं। वे बेवाकी से लेखन करते हैं। वे जिसको देखते हैं, जो बात उन्हें उद्वेलित करती है तो वे कविता के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं।
शिक्षक उमेश पांडे ने कहा की कवि की कविता में साफगोई झलकती है। कवि के व्यवहार में जो झलकता है वो कविता में दिखता है। कवि के जीवन की पवित्रता ही ये कविताएं हैं।


छाया चित्रकार जयमित्र सिंह बिष्ट ने कहा की प्रो जोशी की कविताएं समाज के सत्य और बदलाव का आईना है। कवि अपनी बात को बेवाकी से कहते हैं। उन्होंने कवि प्रो जोशी और जननेता स्वर्गीय शमशेर सिंह बिष्ट के बीच साहित्य से जुड़े संस्करण साझा किए।
पत्रकार जगदीश जोशी ने कहा कि साहित्य समाज का आईना है। समाज में कविताएं ही बदलाव लाती हैं। उन्होंने कविताओं के संबंध में अपनी बात रखी।
डॉ ललित चन्द्र जोशी ने कहा कि यह बिनसर से जुड़ा अयारपानी क्षेत्र सरगोशियों के स्वर संग्रह के बहाने साहित्य के लिए नई चर्चा का केंद्र बन गया है। यह क्षेत्र आज ऐतिहासिक क्षण का साक्षी है।
डॉ अरुण कलखुडिया ने कहा कि जोशी की कविता बहुत गंभीर हैं। वह भीतर से झकझोरती है।

आयोजन स्थल फॉरेस्ट विश्प के संचालक अभिषेक जोशी ने अपने पिता के इस कविता संग्रह को लेकर कहा कि आज के दौर में वो हमें प्रेरित करती हैं।
इस अवसर पर साइकिलिस्ट दिनेश दानू और गौरव कांडपाल ने अपनी बात रखी।
कवि प्रो सुशील जोशी ने आभार जताते हुए कहा कि साहित्य और शिक्षा से जुड़े विद्वानों ने पुस्तक लोकार्पण कर और चर्चा कर इस शाम को यादगार बना दिया। इसके लिए सभी का आभार। उन्होंने अपनी पुस्तक को लेकर कहा कि यह संग्रह एक तरह से मेरा शब्दकोश है। उन्होंने कहा कि उलूक टाइम्स ब्लॉग में लगभग 1600-1700 कविताएं हैं। जिनमें से कुछ कविताओं को इस संग्रह में लाने का प्रयास किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *