Almora कवयित्री कमला बिष्ट ‘कमल’ के दो काव्य संग्रह ‘भावपुंज और ‘अनुभूति’ का विमोचन

Almora कवयित्री कमला बिष्ट ‘कमल’ के दो काव्य संग्रह ‘भावपुंज और ‘अनुभूति’ का विमोचन हुआ।

साथ ही काव्य गोष्ठी का आयोजन

अल्मोड़ा के स्थानीय होटल में छंजर सभा के तत्त्वावधान में सभा की कवयित्री कमला बिष्ट ‘कमल’ के काव्य संग्रह ‘भावपुंज और ‘अनुभूति’ का विमोचन हुआ। इस अवसर पर काव्य गोष्ठी भी हुई। विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री प्रकाश चन्द्र जोशी, मुख्य वक्ता डॉ ललित चन्द्र जोशी, अध्यक्षता श्री नवीन बिष्ट, विशिष्ट अतिथि रूप में शांतिकुंज के भीम सिंह अधिकारी, श्रीमती नीलम नेगी, रचनाकार कमला बिष्ट, मंच संचालक नीरज पंत और छंजर सभा के संयोजक डॉ रमेश लोहुमी ने दीप प्रज्ज्वलित किया। डॉ. धारा बल्लभ पांडे ने मंत्रोच्चार किया। विमोचन अवसर के मुख्य वक्ता डॉ ललित चन्द्र जोशी ने ‘भावपुंज’ और ‘अनुभूति’ की समीक्षा की और कहा कि कमला बिष्ट ‘कमल’ की कविताएं जीवन के यथार्थ, सत्य, सामाजिक चेतना, जन जागरण, देशभक्ति और प्रेरणा से जुड़ी हुई हैं। वे निरुत्साही को उत्साही बनाती हैं। कमला बिष्ट की कविताओं में संवेदना का स्वर मुखर होता है। उन्होंने अल्मोड़ा की छंजर से जुड़ी श्रीमती बिष्ट को काव्यसंग्रह के लिए बधाइयाँ दी। विशिष्ट अतिथि भीम सिंह अधिकारी (शांतिकुंज) ने कहा कि कमला को अभी बहुत कुछ करना है। वे साहित्य की सेवा करें, उन्हें बधाई।विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवयित्री नीलम नेगी ने कहा कमला छोटी-छोटी बात को गंभीरता से लेती हैं और वही विषय उनकी कविताओं में दृष्टिगोचर हुए हैं। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि कमला के साहित्य में शहीद, सेफ्टीपिन, महिला आदि कविताओं के साथ साथ छोटे-छोटे विषयों पर भी बहुत उत्कृष्ट रचनाएं हैं। उन्होंने रचनाकार को बधाइयां दी। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा साहित्यिक भूमि में निरंतर सृजन होना, गर्व की बात है। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि नवीन बिष्ट ने कहा ‘भावपूंज’ कविता संग्रह ऐसा स्रोत है जो सामर्थ्य पैदा करता है। उनकी ‘अनुभूति’ काव्यसंग्रह में अंतर्मन की शक्ति से प्रेरित कविताएं में प्रकाश आयी हैं। इस अवसर पर छंजर सभा के संयोजक डॉ रमेश चंद्र लोहुमी और श्री रमेश चंद्र बिष्ट ने विमोचन कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाएं देखी। विमोचन के उपरांत काव्य गोष्ठी आयोजित हुई जिसमें कवि कृपाल सिंह शीला ने कहा तिरंगे को कभी ना झुकने देंगे। कवि डी एन कांडपाल ने कहा मत छीन किताबें मां मुझे मैं जीत तुम्हें दिखाऊंगी। कवयित्री प्रेमा गड़कोटी ने कहा पिता को कठोर ही माना गया अक्सर, पाया गया है माँ से भी ज्यादा मायालु। श्री नीलम नेगी ने कहा जन्मदिन पर तुझे और क्या उपहार दूं। श्री डी.सी.पांडेय ने कहा विकासक नाम पर म्यार आँग भौत निशान लागि हालि। कवि प्रोफेसर एस ए.हामिद ने कवयित्री कमला बिष्ट की कविताओं का सस्वर पाठ किया और उन्हें बधाइयां दी। कवि नीरज पंत ने कहा- आती नहीं शर्म यारो, हो गए हम बेशर्म यारो। कवयित्री चंद्रा उप्रेती ने कहा जिम्मेदारियां के बोझ में सुकून कहीं था दब गया। डॉ. धारा बल्लभ पांडे ने कहा सुंदर प्यारा देश हमारा। नवीन कुमय्या ने कहा मुझे पसंद नहीं वह औरतें जो भावना की कलम तोड़ती हैं। कवि बृजेश डसीला ने कहा मेरी तरह मेरा प्यार भी है बेरोजगा। कवयित्री बीना चतुर्वेदी ने कहा बेमोल बिक जाती हूँ इस प्रेम के खातिर।वरिष्ठ कवि त्रिभुवन गिरी महाराज ने सभी को शुभकामनाएं दी। विमोचन कार्यक्रम का संचालन कवि नीरज पंत ने किया। छंजर सभा के तत्वाधान में आयोजित हुए इस विमोचन कार्यक्रम में डॉ डी.एस. बोरा, बाल प्रहरी के संपादक उदय किरोला, कवि विपिन चंद जोशी कोमल, प्रोफेसर एस एस पथनी, डॉक्टर हयात रावत, पत्रकार संजय अग्रवाल, यशस्वी बिष्ट, ओजस्वी बिष्ट, रमेश सिंह बिष्ट, डॉ जे सी दुर्गापाल, डॉ वसुधा पंत के साथ साहित्यकारों, शिक्षकों और गणमान्य नागरिकों ने प्रतिभाग किया।

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